

UPSC गुरु विजेंद्र चौहान ने ChatGPT को लेकर जातिवाद से जुड़ी टिप्पणी की, जो वायरल हो गई।
AI खुद जातिवादी नहीं, लेकिन एकतरफा (उच्च जाति-प्रधान) डेटा से ट्रेन होने के कारण पक्षपाती जवाब दे सकता है।
चौहान हिंदी साहित्य के विद्वान और दृष्टि IAS में मॉक इंटरव्यू पैनल से जुड़े रहे हैं।
भारत एक ऐसा देश है जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं, विभिन्न भाषाएं बोली जाती हैं और यहाँ विभिन्न जाति के लोग भी रहते हैं। खास बात यह है कि ये भारत की खूबसूरती को भी दिखाते हैं और विवाद भी इन्हीं में से पनपते हैं। ऐसा कह सकते हैं ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। भारत में आए दिन, जाति-धर्म और भाषा को लेकर विवाद होता ही रहता है।
कभी छोटी नोक झोंक होती है, तो कभी ये आपराधिक मामला भी बन जाता है। यही कारण है कि कई ऐसे बुद्धिजीवी हैं, जो ऐसे मामलों पर चुप्पी साधे रहते हैं जबकि कुछ ऐसी टिप्पणी कर देते हैं, जिससे माहौल गरम हो जाता है। ऐसा ही कुछ हुआ है।
दरअसल, UPSC के गुरु हैं, विजेंद्र चौहान (Vijendra Chauhan) जिन्होंने जातिवाद को लेकर एक टिप्पणी की है, जिसके बाद भारी बवाल मच गया है और इस समय वो चर्चा का विषय बने हुए हैं। आइये समझते हैं, पूरा मामला।
'आपके बैठने का तरीका थोड़ा कैजुअल है', मीम जगत में ये आपने बहुत सुना होगा लेकिन असल में ये UPSC के एक मॉक इंटरव्यू में विजेंद्र चौहान (Vijendra Chauhan) ने एक स्टूडेंट से बोला था। शिक्षक विकास दिव्यकीर्ति द्वारा दृस्टि IAS संस्थान चलाया जाता है जहाँ UPSC की तैयारी करवाई जाती है। इस शिक्षा संस्थान द्वारा UPSC का मॉक इंटरव्यू भी आयोजित होता है ताकि विद्यार्थियों को ये अनुमान मिल सके कि इंटरव्यू कैसे होता है। इसी में विजेंद्र चौहान भी पहले नज़र आते थे। आज के समय में सोशल मीडिया पर वो जाना माना चेहरा हैं।
अब उनका ही एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उन्होंने ChatGPT का जिक्र किया और कहा कि इसे सवर्णों यानी उच्च जाति के लोगों ने बनाया है, इसलिए ये उनके हितों को बढ़ावा देता है।
UPSC गुरु विजेंद्र चौहान (Vijendra Chauhan) का एक वीडियो है, जिसमे वो ChatGPT का अर्थ समझा रहे हैं। उन्होंने कहा, ''इसका अर्थ है, 'जेनरेटिव प्री-ट्रेंड ट्रांसफार्मर' और इसकी अहम समस्या 'प्री-ट्रेंड' होने में है। चौहान के मुताबिक इंटरनेट पर उपलब्ध अधिकांश कंटेंट और डेटा उच्च जाति के लोगों द्वारा तैयार किया जाता है, इसलिए AI अनजाने में उनके हिसाब से जवाब देता है। उनके हिसाब से अगर AI को कोई प्रॉम्प्ट दिया जाए, तो वह सवर्ण मानसिकता से प्रभावित उत्तर दे सकता है।
विजेंद्र चौहान (Vijendra Chauhan) का यह भी कहना है कि AI खुद से जातिवादि नहीं होता है, बल्कि उसे ट्रेनिंग देने वाला डाटा एक तरफा होता है। चौहान ने 'कचरा अंदर, कचरा बाहर' (Garbage In, Garbage Out) के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि अगर इनपुट डेटा में सामाजिक भेदभाव मौजूद है, तो आउटपुट भी उसी तरीक़े का होगा।
विजेंद्र चौहान (Vijendra Chauhan) ने आगाह करते हुए कहा कि जिस मशीन की तकनीकी नींव ही एकतरफा जवाब पर टिकी हो, वह सामाजिक न्याय कतई नहीं कर सकती। उनके मुताबिक ये एक सामाजिक चिंता का विषय है।
विजेंद्र चौहान (Vijendra Chauhan) एक शिक्षक हैं। डॉक्टर ज़ाकिर हुसैन कॉलेज में वो एसोसिएट प्रोफेसर (Associate Professor) के पद पर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी में बीए ऑनर्स की डिग्री हासिल की है। ग्रैजुएशन के बाद विजेंद्र ने यहीं से हिन्दी में ही मास्टर्स की डिग्री भी हासिल की है।
उनके पास बीएड और एमफिल की डिग्री भी है और डीयू से ही उन्होंने मीडिया और लिटरेचर में पीएचडी भी किया है। विजेंद्र चौहान (Vijendra Chauhan) दृष्टि IAS में मॉक इंटरव्यू भी करते हैं। पिछले काफी समय से वो दृष्टि IAS के वीडियो में देखे नहीं गए हैं, तो ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि उन्होंने ये संस्था छोड़ी है या नहीं।