

क्रिकेट के दीवाने देश भारत में किसी भी दूसरे खेल से जुड़े खिलाड़ी के लिए अपनी पहचान बनाना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन असाधारण प्रतिभा वाले खिलाड़ी अपनी पहचान बना ही लेते हैं। नारायण कार्तिकेयन ऐसा ही एक नाम है। कार्तिकेयन की बाइक की रफ्तार ने फॉर्मूला वन में देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।
भारतीय मोटरस्पोर्ट्स (Indian motorsports) के इतिहास में अपनी अमिट पहचान बनाने वाले नारायण कार्तिकेयन का जन्म 14 जनवरी 1977 को तमिलनाडु (Tamil Nadu) के कोयंबटूर में हुआ था। उनके पिता के. एस. नारायणसामी खुद एक पूर्व नेशनल रैली चैंपियन रहे थे, इसलिए रेसिंग के प्रति कार्तिकेयन का जुनून बचपन से ही था। कार्तिकेयन ने 1990 के दशक के आखिर में प्रतिस्पर्धी रेसिंग में कदम रखा। यह वह दौर था, जब भारत (India) में इस खेल को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन अपनी मेहनत और जुनून से कार्तिकेयन ने न सिर्फ भारतीय व एशियाई सर्किट्स में अपनी पहचान बनाई, बल्कि वैश्विक मंच पर बड़े चेहरे के रूप में उभरे।
2000 में नारायण कार्तिकेयन (Narayan karthikeyan) ने फॉर्मूला एशिया चैम्पियनशिप जीता। ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय थे। इस उपलब्धि के बाद उन्होंने फॉर्मूला फोर्ड, फॉर्मूला रेनॉल्ट और ब्रिटिश फॉर्मूला 3 जैसी कठिन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। 2005 उनके करियर के लिए काफी अहम साल था। उन्होंने जॉर्डन ग्रां प्री टीम के साथ फार्मूला वन में डेब्यू किया था। नारायण एफ1 में रेस करने वाले पहले भारतीय ड्राइवर बने। उसी सीजन में यूनाइटेड स्टेट्स ग्रां प्री में वह चौथे स्थान पर रहे थो, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।
कार्तिकेयन ने 2011 और 2012 में एचआरटी टीम के साथ फार्मूला वन में वापसी की। फार्मूला वन के अलावा, कार्तिकेयन ने एंड्योरेंस रेसिंग में भी नाम कमाया और 24 आवर्स ऑफ ले मैंस जैसी प्रतिष्ठित रेस में हिस्सा लिया। जापान की सुपर फार्मूला सीरीज में भी नियमित रूप से प्रतिस्पर्धा की।
भारत में मोटरस्पोर्ट्स (Motorsports) को आगे बढ़ाने और इसे वैश्विक मंच (Global Platform) तक पहुंचाने में नारायण कार्तिकेयन का योगदान अमूल्य रहा है। वे भारत में मोटरस्पोर्ट्स का सबसे बड़ा चेहरा रहे हैं। उनकी सफलता ने देश में युवाओं को इस खेल से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। करुण चंडोक जैसे युवा ड्राइवर कार्तिकेयन को अपनी प्रेरणा मानते हैं।
2020 में उन्होंने पेशेवर मोटर रेसिंग में प्रतिस्पर्धा करना बंद कर दिया था। संन्यास के बाद भी वह इस खेल से जुड़े हुए हैं। वे मोटरस्पोर्ट के विकास, ड्राइवरों के प्रशिक्षण और कमेंट्री से जुड़े हैं।
भारत सरकार (Government of India) ने उन्हें 2010 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।
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