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दुनिया

लोकतंत्र ने कैसे एक चाय वाले को बनाया पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली में 76 सत्र मे संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए एक सकारात्मक और प्रेरक भाषण दिया।

स्टेशन पर चाय बेचने वाले का बेटा चौथी बार संयुक्त राष्ट्र को संबोधित कर रहा है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (IANS)

शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली में 76 सत्र मे संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए एक सकारात्मक और प्रेरक भाषण दिया।

यूएनजीए में भाषणों के सप्ताहांत चरण की शुरुआत के कुछ ही क्षणों के भीतर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "लोकतंत्र उद्धार कर सकता है, लोकतंत्र ने करके दिखाया है"। अपनी बात को आगे कहते हुए उन्होंने गहरी संवेदना से भरी, खुद के बारे में व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा, "स्टेशन पर चाय बेचने वाले का बेटा चौथी बार संयुक्त राष्ट्र को संबोधित कर रहा है।


सबसे लंबे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करते हुए मुझे 20 साल हो गए। हां, लोकतंत्र ऐसा कर सकता है। लोकतंत्र ने करके दिखाया है। उन्होंने भारत को "मदर ऑफ डेमोक्रेसी" बताते हुए कहा "जब भारत की प्रगति होती है तो विश्व के विकास को भी गति मिलती है"। नरेंद्र मोदी ने यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली पर निशाना कस्ते हुए अपने भाषण में आचार्य चाणक्य का उल्लेख करते हुए कहा "जब सही समय पर सही कार्य नहीं किया जाता तो समय ही उस कार्य की सफलता को समाप्त कर देता है"।

यह भी पढ़ें : यूएनजीए में पीएम मोदी के संबोधन की 10 प्रमुख बातें

शुक्रवार को मोदी ने न्यूयॉर्क में होने वाले क्वाड सम्मेलन के कार्यक्रम में शामिल हुए, इससे पहले उन्होंने व्हाइट हाउस में क्वाड के साथी देश अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन के साथ द्विदेशीय बैठक भी की। पहली इन-पर्सन लीडर-स्तरीय क्वाड मीटिंग ने अक्टूबर 2021 से शुरू होने वाले कोवैक्स सहित कोविड टीकों के निर्यात को फिर से शुरू करने की भारत की घोषणा का स्वागत किया। एक संयुक्त बयान में क्वाड नेता, भारत के नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के स्कॉट मॉरिसन, जापान के योशीहिदे सुगा और अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने पाकिस्तान और चीन का नाम लेते हुए आतंकवाद, प्रॉक्सी और सीमा पार हमलों की संयुक्त बयान में निंदा की।

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महामारी के बीच किताबों ने स्पीति के बच्चों को नई दुनिया से परिचित कराया(सांकेतिक तस्वीर, Pixabay)

By: विशाल गुलाटी

हिमाचल प्रदेश में स्पीति घाटी के छोटे-छोटे इलाकों, कस्बों में रहने वाले सैकड़ों प्राथमिक छात्रों के लिए कहानी की किताबों ने एक तरह से नई दुनिया के दरवाजे खोल दिए हैं। उनकी जिज्ञासा को शांत करने के प्रयास का श्रेय दिल्ली स्थित एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) को जाता है जिसने चित्रों और कहानी की किताबों के माध्यम से इन बच्चों को एकदम नई दुनिया से परिचित कराया और उनमें पढ़ने की आदत डाली।

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