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प्रधानमंत्री मोदी हैं दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता : सर्वे

अप्रूवल रेटिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने अमरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन समेत दुनिया भर के 13 राष्ट्र प्रमुखों को पीछे छोड़ दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता ( wikimedia Commons )

अमेरिकी डेटा इंटेलिजेंस फर्म ‘द मॉर्निंग कंसल्ट’ की एक सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्रूवल रेटिंग 71% दर्ज की गई है यह जानकारी 'द मॉर्निंग कंसल्ट' ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिए साझा की है। 'द मॉर्निंग कंसल्ट' के सर्वे के मुताबिक अप्रूवल रेटिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने अमरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन समेत दुनिया भर के 13 राष्ट्र प्रमुखों को पीछे छोड़ दिया है।

मॉर्निंग कंसल्ट’ दुनिया भर के टॉप लीडर्स की अप्रूवल रेटिंग ट्रैक करता है। मॉर्निंग कंसल्ट पॉलिटिकल इंटेलिजेंस वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, स्पेन, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में नेताओं की रेटिंग पर नज़र रख रही है। रेटिंग पेज को सभी 13 देशों के नवीनतम डेटा के साथ साप्ताहिक रूप से अपडेट किया जाता है।



इसके तहत दुनिया भर में बदलती राजनीतिक गतिशीलता में रियल टाइम की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। मॉर्निंग कंसल्ट हर देश के वयस्कों के बीच सर्वे कर ये रैकिंग तैयार करती है। मॉर्निंग कंसल्ट ने बताया है कि रेटिंग प्रत्येक देश के वयस्क नागरिकों के सात दिन के औसत सर्वे पर आधारित होती है। सर्वे में शामिल लोगों की संख्या हर देश के मुताबिक अलग-अलग होती है। इससे पहले भी पीएम मोदी ने नवंबर 2021 में विश्व के सबसे लोकप्रिय नेताओं की सूची में शीर्ष स्थान पाया था।

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बता दें कि इस बार के सर्वे में अमेरिकी राष्ट्रपति छठे नंबर पर और ब्रिटिश प्रधानमंत्री 13वें पॉजिशन पर हैं।इस सर्वे में पीएम मोदी की अप्रूवल रेटिंग 71% है। 13 से 19 जनवरी के बीच कराए गए इस सर्वे में भारतीय प्रधानमंत्री दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों से काफी आगे हैं। पीएम मोदी ने मैक्सिकन राष्ट्रपति आंद्रे मैनुएल लोपेज ओब्राडोर, इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी, जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन समेत कई बड़े नेताओं को लोकप्रियता के ग्राफ में पीछे छोड़ दिया है।

Various source ; Edited by Abhay Sharma

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एक अध्ययन ने बताया है की सवाना अग्नि प्रबंधन शेरों को बचाने के लिए राजस्व उत्पन्न कर सकता है। (Wikimedia Commons)

शोधकर्ताओं ने आग प्रबंधन आधारित कार्बन-वित्तपोषण कार्यक्रमों(Carbon Financing Programs) की संभावनाओं का पता लगाया है, ताकि अफ्रीका में आर्थिक कमी को पूरा किया जा सके और सवाना पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान होने से बचाया जा सके। जैव विविधता अनुसंधान संस्थान (Diversity Research Institute) ने सवाना अग्नि प्रबंधन को लेकर एक पब्लिकेशन की घोषणा की है, जो अफ्रीका के रैंजलैंड को बहाल करने के लिए पर्याप्त कार्बन राजस्व उत्पन्न कर सकता है।

बीआरआई के क्लाइमेट चेंज प्रोग्राम के निदेशक और मुख्य लेखक टिम टियर कहते हैं, "कार्बन राजस्व के लिए अप्रयुक्त क्षमता के बारे में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है जो अफ्रीका में संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन का समर्थन करेगा।"

अफ्रीका(Africa) में कई सवाना(Savannah)-आश्रित प्रजातियां, जिनमें बड़े शाकाहारी और शीर्ष शिकारी शामिल हैं, उनका विलुप्त होने का खतरा बढ़ रहा है। अफ्रीका में संरक्षित क्षेत्रों के प्रभावी प्रबंधन को प्राप्त करने की अनुमानित लागत जहां शेर रहते हैं, सालाना 2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

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Credit- Wikimedia Commons

भारतीय रेलवे (Wikimedia Commons)

पूर्व मध्य रेल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद इसके अनुपालन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इको स्मार्ट स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मध्य रेल के 52 चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड द्वारा सुझाए गए 24 इंडिकेटर (पैरामीटर) लागू किए हैं। सभी 52 स्टेशनों ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक प्रमाणन आईएसओ-14001:2015 प्राप्त किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित पूर्व मध्य रेल के 52 नामांकित स्टेशनों में से 45 का संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें के लिए सहमति-से-स्थापित (सीटीई) प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुतियां सुनिश्चित कीं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेष कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के सभी 45 स्टेशनों के लिए स्थापना की सहमति के लिए एनओसी प्राप्त कर ली गई है और 32 स्टेशनों को कंसेंट-टू-ऑपरेट (सीटीओ) दी गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणीकरण ने पूर्व मध्य रेलवे को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें द्वारा निर्धारित पानी, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों की आवश्यकता को सुव्यवस्थित करने में मदद की है।

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यूएनईपी की रिपोर्ट ने कहा जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में भारत विकसित देशों से आगे [Wikimedia Commons]

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव (Bhupendra Yadav) के अनुसार, विकसित देश जहां जलवायु परिवर्तन(global warming) से लड़ने के अपने लक्ष्यों को पूरा करने में विफल दिख रहे हैं, वहीं भारत ने अपने लक्ष्य को पार कर लिया है।

उन्होंने(Bhupendra Yadav) मंगलवार को जलवायु कार्रवाई पर महासभा की एक उच्च स्तरीय बैठक में कहा, "जहां विकसित दुनिया 2020 से पहले की अवधि में 18 प्रतिशत की कमी के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 14.8 प्रतिशत (ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन) उत्सर्जन में कमी के साथ कार्यो का प्रदर्शन कर रही है, वहीं भारत उत्सर्जन में कमी के अपने स्वैच्छिक लक्ष्य को प्राप्त कर रहा है।"

उन्होंने कहा, "पेरिस समझौते के तहत हमारे 2030 लक्ष्यों को महत्वाकांक्षी और पेरिस समझौते के लक्ष्यों के अनुकूल माना जाता है। हम उन लक्ष्यों को प्राप्त करने की राह पर हैं ।"

मंगलवार को जारी संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की उत्सर्जन गैप रिपोर्ट ने भी भारत की इस उपलब्धि की पुष्टि की और कहा(Bhupendra Yadav) कि उसे इस सिलसिले में और बेहतर काम करना चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है , ''भारत को मौजूदा नीतियों के तहत अपने पिछले बिना शर्त एनडीसी (राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान) उत्सर्जन लक्ष्य स्तरों की तुलना में कम से कम 15 प्रतिशत के स्तर तक कम करने का अनुमान लगाया गया, जो उनकी एनडीसी महत्वाकांक्षा को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।"

एनडीसी, ग्लोबल वामिर्ंग को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस नीचे रखने के पेरिस जलवायु परिवर्तन(global warming) लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्सर्जन में कटौती के लिए देशों द्वारा निर्धारित लक्ष्य हैं और एनडीसी की महत्वाकांक्षा उन लक्ष्यों को बढ़ा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, केवल रूस और तुर्की ही भारत के समान स्तरों को पूरा कर पाए हैं।

developed and developing countries list विकसित और विकासशील देश (Wikimedia Commons)

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