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संस्कृति

हिंदुओं को यह सोचकर और प्रताड़ित करना सही नहीं है कि वे कुछ नहीं करते और चुप रहते हैं :महंत विश्वप्रसन्ना​​​

महंत ने कहा कि हिंदुओं में अन्य धर्मों के लोगों की तरह हिंसक मानसिकता नहीं होती है पर सरकार को स्थिति से बाहर होने से पहले कार्रवाई करनी चाहिए

हिंदुओं में अन्य धर्मों के लोगों की तरह हिंसक मानसिकता नहीं होती है।(Wikimedia Commons)

पेजावर मठ के महंत विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी ने हाल के दिनों में बांग्लादेश और कश्मीर में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे हिंसा पर शनिवार को कहा कि हिंदुओं को यह सोचकर और प्रताड़ित करना सही नहीं है कि वे कुछ नहीं करते और चुप रहते हैं।

उन्होंने कहा कि हिंदुओं में अन्य धर्मों के लोगों की तरह हिंसक मानसिकता नहीं होती है पर सरकार को स्थिति से बाहर होने से पहले कार्रवाई करनी चाहिए।


 Ram Mandir Ayodhya श्री राम मंदिर , अयोध्या (Wikimedia Commons)

उन्होंने कहा कि अगर सरकार नहीं चाहती कि उसके लोग कानून अपने हाथ में लें, तो उन्हें स्थिति को नियंत्रित करना चाहिए। सरकार को सिर्फ एक धर्म के लोगों की नहीं बल्कि समाज में सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। सभी धर्मों के लोगों को शांति से रहना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार मौजूद है। यदि सरकार इस संबंध में कार्रवाई नहीं करती है तो सांप्रदायिक झड़पें और हिंसा होगी। एक बार जब यह टूट जाता है, तो इसे रोकना संभव नहीं।

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चुनाव में नेताओं द्वारा होने वाले भड़काऊ बयानबाजी पर उन्होंने कहा कि चुनाव के समय सांप्रदायिक मुद्दों पर चर्चा की जाती है और धीरे-धीरे वे फीके पड़ जाते हैं। राजनेता विशेष जातियों से वोट पाने के लिए बयान जारी करते हैं। लेकिन ये बयान समाज में सद्भाव को प्रभावित करते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि कर्नाटक के डोड्डाबल्लापुर क्षेत्र के ग्रेनाइट पत्थर अयोध्या में श्री राम मंदिर की नींव पर रखे जाएंगे, जिस पर मंदिर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा,'' यह कर्नाटक के लोगों के लिए गर्व और सम्मान की बात है।''

Input: IANS ; Edited By: Manisha Singh

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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से रहस्यमय परिस्थितियों में 60 लाख रुपये निकाल लिए गए।(Wikimedia Commons)

नागरवाला मामला या नागरवाला कांड एक भारतीय धोखाधड़ी के मामले को संदर्भित करता है। यह कांड 24 मई 1971 कि सुबह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के संसद मार्च ब्रांच में हुआ था। चीफ कैसियर वेद प्रकाश मल्होत्रा के सामने रखा फोन अचानक बचता है फोन की दूसरी ओर से एक व्यक्ति ने अपना परिचय देते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री के कार्यालय से प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी एन हकसर बोल रहे हैं उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री को बांग्लादेश में गुप्त अभियान के लिए 60 लाख रुपए की जरूरत है, उन्होंने वेद प्रकाश मल्होत्रा को निर्देश दिए कि वह बैंक से 60 लाख रुपए निकाले और बैंक से थोड़ी दूर संसद मार्ग पर ही बाइबल भवन के पास खड़े एक व्यक्ति को पकड़ा दे, और यह सारी रकम ₹100 के नोटों में होनी चाहिए।

आगे प्रधानमंत्री के कार्यालय से प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव हक्सर ने मल्होत्रा से कहा कि "लीजिए प्रधानमंत्री से बात कीजिए" उसके कुछ सेकंड बाद, श्रीमती गांधी लाइन पर आईं और उन्होंने मल्होत्रा से कहा कि आप वह पैसे लेकर खुद बाइबल भवन पर आइए वहां एक शख्स आप से मिलेगा। उन्होंने कहा कि वे उस व्यक्ति को पैसे दें जो उनके पास कोड वर्ड: "बांग्लादेश का बाबू" के साथ संपर्क करेगा। आपको उसके जवाब में "बार-एट-लॉ" कहना होगा, और फिर पूरी राशि आप उस व्यक्ति को दे दें। "जैसा आप चाहते हैं, माताजी," मल्होत्रा ने उत्तर दिया।

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पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल। (Wikimedia Commons)

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल की ओर से पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बयान देने और इसके बाद उनके आवास पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बाद कांग्रेस पार्टी बंटी हुई नजर आ रही है। सिब्बल के आवास पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन को कई नेताओं ने गुंडागर्दी करार दिया है।

यह पहली बार नहीं है, जब पार्टी में दरार आई है। इंदिरा गांधी के समय में 12 नवंबर 1969 को के. कामराज के साथ मतभेदों को लेकर कांग्रेस दो भागों में विभाजित हो गई थी। पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने के लिए इंदिरा गांधी को कांग्रेस पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। उसके बाद उन्होंने कांग्रेस (आर) का गठन किया और एआईसीसी के अधिकांश सदस्य उनके पक्ष में चले गए।

इसी तरह की स्थिति मार्च 1998 में पैदा हुई थी, जब सीडब्ल्यूसी की बैठक में सीताराम केसरी को दरकिनार कर दिया गया और सोनिया गांधी को अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इस घटनाक्रम के बाद वरिष्ठ नेता शरद पवार, तारिक अनवर और पी. ए. संगमा ने पार्टी छोड़ दी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का गठन किया।

इसके अलावा राजीव गांधी के खिलाफ वी. पी. सिंह द्वारा विद्रोह किया गया था और वह 1989 में भाजपा की मदद से प्रधानमंत्री बने। फिर जब नरसिम्हा राव पार्टी अध्यक्ष बने तो माधव राव सिंधिया ने एमपी कांग्रेस, जीके मूपनार द तमिल मनीला कांग्रेस और एन. डी. तिवारी, अर्जुन सिंह और शीला दीक्षित ने तिवारी कांग्रेस का गठन किया और इसे तब विलय किया गया, जब सोनिया गांधी पार्टी अध्यक्ष बनीं।

इसके अलावा ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का गठन किया जो अब पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी है। वाईएसआरसीपी भी एक कांग्रेस ऑफ-शूट (कांग्रेस पार्टी से अलग होकर बनाया गया दल) है, जो आंध्र प्रदेश में शीर्ष पर है। वहीं इस दिशा में पुडुचेरी में एन. आर. कांग्रेस का नाम भी आता है। सिब्बल की घटना पर कार्रवाई की मांग करने वाले जी-23 के साथ पार्टी एक बार फिर फूट के कगार पर है। लेकिन शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है, जिसका अर्थ है कि कोई कार्रवाई होने की संभावना नहीं है।

नेताओं ने कार्यकर्ताओं को अदालतों और संसद में पार्टी के लिए सिब्बल के योगदान की याद दिलाई। वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने घटना को सुनियोजित करार दिया। उन्होंने कहा, "मैं कल रात कपिल सिब्बल के आवास पर सुनियोजित गुंडागर्दी की कड़ी निंदा करता हूं। वह एक वफादार कांग्रेसी हैं, जो संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह पार्टी के लिए लड़ रहे हैं।"

गुलाम नबी आजाद ने गुंडागर्दी को अस्वीकार्य बताते हुए आगे कहा कि किसी भी तरफ से किसी भी सुझाव का स्वागत किया जाना चाहिए। इसी तरह कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और विवेक तन्खा ने भी नाराजगी जताई है, जबकि आनंद शर्मा ने कहा कि वह हैरान हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, जिन्होंने पार्टी छोड़ने का इरादा दिखाया है, ने आरोप लगाया कि वरिष्ठों का अपमान किया जाता है।

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अब पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के वफादारों और सुधारों की चाह रखने वालों के बीच दरार बढ़ गई है, लेकिन कोई भी ऐसा नहीं है, जो दोनों गुटों को एक साथ ला सके। एक नेता ने कहा, "यह विडंबना ही है कि पूरे संकट में राहुल गांधी खुद एक पार्टी बन गए हैं, बल्कि उन्हें समाधान प्रदाता होना चाहिए था।" नेता ने कहा कि बुरी सलाह और एक मंडली के बुरे फैसलों के कारण पार्टी इतने निचले स्तर पर पहुंच गई है। वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी के वफादार अजय माकन और रणदीप सिंह सुरजेवाला ने नेतृत्व पर सवाल उठाने वाले नेताओं पर हमला बोला है।

अमरिंदर सिंह, जो निकास द्वार पर हैं, ने भी आलोचना करते हुए कहा, "दुर्भाग्य से वरिष्ठों को पूरी तरह से दरकिनार किया जा रहा है।" यह कहते हुए कि यह पार्टी के लिए अच्छा नहीं है, उन्होंने कपिल सिब्बल के घर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए उपद्रव की भी निंदा की, क्योंकि उन्होंने उन विचारों को व्यक्त करने की ठानी, जो पार्टी नेतृत्व के अनुकूल नहीं थे।

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स्वामी करपात्रीजी महाराज एवं अन्य संत प्रतिनिधियों के नेतृत्व में लाखों साधुओं और गौरक्षकों ने किया था संसद का घेराव।(NewsGram Hindi)

सनातन धर्म में साधुओं को सहनशील, धीर एवं तप में लीन ही देखा गया है। उन्हें देश में क्या उठा-पटक चल रही है उससे कोई मतलब नहीं रहता। सनातन धर्म में साधु और संत परम आदरणीय माने गए हैं। यह वही समाज है जिनकी बदौलत आज भी एक हिन्दू अपने वेदों और ग्रंथों के ज्ञान पर इतराता है। उन्होंने ने ही दुनिया में सनातन धर्म के प्रचार को सुचारु रूप से आगे बढ़ाया है। इस्लामिक या ईसाई कट्टरवादियों के विपरीत संत समाज ने कभी हिंसा का प्रयोग नहीं किया और न ही करने की सीख दी। किन्तु जब किसी अपराध को आप अपने सामने लगातार होते हुए देखते हैं, तब वह सहनशीलता भी रौद्र रूप ले लेती है।

कुछ ऐसा ही हुआ था वर्ष 1966 में, जब देश में गौ-हत्या को रोकने के लिए लाखों साधुओं ने देश भर में एक आंदोलन को जन्म दिया था। एक ऐसा आंदोलन जिसमें न तो अपना स्वार्थ था और न ही पैसों का मोह। यह आंदोलन उस जीव के लिए था जिसे हिन्दू धर्म में माँ स्थान प्राप्त है। ‘गाय’, जिनके दूध से बच्चे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होते हैं, ऐसी कई औषधीय तत्त्व हैं जो के गाय के दूध में उपलब्ध होती हैं और यही कारण है की हम उन्हें गौ माता कह कर पुकारते हैं।

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