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टेक्नोलॉजी

'संभावित रूप से हानिकारक' कंटेंट की विजिबिलिटी को कम करेगा इंस्टाग्राम

मेटा के स्वामित्व वाला फोटो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम अपने ऐप में 'संभावित रूप से हानिकारक' कंटेंट को कम दिखाई देने के लिए नए कदम उठा रहा है।

'संभावित रूप से हानिकारक' कंटेंट की विजिबिलिटी को कम करेगा इंस्टाग्राम (Wikimedia Commons)

मेटा(Meta) के स्वामित्व वाला फोटो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) अपने ऐप में 'संभावित रूप से हानिकारक' कंटेंट को कम दिखाई देने के लिए नए कदम उठा रहा है। एनगैजेट की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने कहा कि यूजर्स के फीड और स्टोरीज में पोस्ट करने के तरीके को सशक्त करने वाला एल्गोरिदम अब ऐसे कंटेंट को प्राथमिकता देगा, जिसमें 'बदमाशी, अभद्र भाषा या हिंसा भड़काने वाली सामग्री हो सकती है।'

इंस्टाग्राम के नियम पहले से ही इस प्रकार की अधिकांश सामग्री को प्रतिबंधित करते हैं, जबकि परिवर्तन सीमा रेखा पोस्ट या कंटेंट को प्रभावित कर सकता है जो अभी तक ऐप के मॉडरेटर तक नहीं पहुंची है। कंपनी ने एक अपडेट में बताया, "यह समझने के लिए कि क्या कोई चीज हमारे नियमों को तोड़ सकती है, हम चीजों को देखेंगे जैसे कि कैप्शन एक कैप्शन के समान है जो पहले हमारे नियमों को तोड़ता था।"


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अब तक, इंस्टाग्राम ने ऐप के सार्वजनिक-सामना वाले हिस्सों से संभावित आपत्तिजनक कंटेंट को छिपाने की कोशिश की है, जैसे कि एक्सप्लोर लेकिन यह नहीं बदला है कि इस प्रकार की सामग्री पोस्ट करने वाले खातों का पालन करने वाले यूजर्स के लिए यह कैसा दिखता है। लेटेस्ट परिवर्तन का अर्थ है कि 'समान' वाली पोस्ट जिन्हें पहले हटा दिया गया है, वे विजिटर्स को भी बहुत कम दिखाई देंगी। मेटा के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की कि 'संभावित रूप से हानिकारक' पोस्ट अभी भी अंतत: हटाए जा सकते हैं यदि पोस्ट अपने सामुदायिक दिशानिर्देशों को तोड़ती है।

यह भी पढ़ें - नेताजी के पास था भारत की वित्तीय और आर्थिक मजबूती का एक विजन : डॉ. अनीता बोस फाफ

अपडेट 2020 में इसी तरह के बदलाव का अनुसरण करता है जब इंस्टाग्राम ने डाउन-रैंकिंग अकाउंट शुरू किया, जिसमें गलत सूचना साझा की गई थी, जिसे फैक्ट-चेकर्स ने खारिज कर दिया था। इस बदलाव के विपरीत, हालांकि, इंस्टाग्राम ने कहा कि लेटेस्ट नीति केवल व्यक्तिगत पोस्ट को प्रभावित करेगी और 'कुल खातों को नहीं'। (आईएएनएस - AS)

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चुनाव नहीं, किसानो के लिए लडूंगा-राकेश टिकैत। (IANS)

देश में किसान लगभग एक साल तक चले किसान आंदोलन(Farmer's Protest) के पोस्टर बॉय और भारतीय किसान यूनियन(Bhartiye Kisaan Union) के राष्ट्रिय प्रवक्ता राकेश टिकैत(Rakesh Tikait)) का कहना है की एक साल तक उन्होंने जो तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करवाने के लिए उन्होंने जो संघर्ष किया उससे वो खुश हैं और उनका चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है।

उन्होंने आगे कहा की किसानो का यह संघर्ष सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। बुधवार को जब राकेश टिकैत जब दिल्ली से मुज़फ्फरनगर लौट रहे थे तो जगह-जगह उनके राजनीतिक होर्डिंग्स लगे हुए थे, टिकैत ने ऐसे लोगों को होर्डिंग्स पर उनकी तस्वीर न लगाने की चेतावनी दी और यह स्पष्ट किया की उनका किसी राजनितिक दल से कोई लेना-देना नहीं है।

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लगभग एक साल से चल रहा है किसान आंदोलन।(Wikimedia Commons)

लगभग एक साल से जारी किसान आंदोलन(farmers protest) जिस उद्देश्य के लिए हुआ था वह उद्देश्य की पूर्ति तो हो गई है। लेकिन आज हम लोग इस बात पर नजर डालेंगे कि इस आंदोलन के कारण देश को कितना नुकसान उठाना पड़ा। आज कैट द्वारा यह जानकारी साझा की गई कि, इस आंदोलन के चलते अब तक करीब 60 हजार करोड़ रुपये के व्यापार का नुकसान हुआ है। कैट ने कहा की, नुकसान के आंकड़े विभिन्न राज्यों से सीएआईटी की अनुसंधान शाखा द्वारा प्राप्त इनपुट पर आधारित हैं।

दरअसल देश भर के विभिन्न राज्यों से प्रतिदिन लगभग 50 हजार ट्रक माल लेकर दिल्ली(Delhi) आते हैं और करीब 30 हजार ट्रक दिल्ली से दूसरे राज्यों में माल ढोते हैं, क्योंकि दिल्ली न तो एक कृषि प्रधान राज्य है और न ही एक औद्योगिक राज्य, इसे अपने सदियों पुराने व्यापार के वितरणात्मक स्वरूप को बनाए रखने के लिए माल की खरीद-बिक्री पर निर्भर रहना पड़ता है और इसलिए दिल्ली किसान आंदोलन का प्रमुख पीड़ित है।

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विपक्ष के 12 सांसदों को राज्यसभा से निलंबित।(Wikimedia Commons)

संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन विपक्ष के 12 सांसदों को राज्यसभा(Rajya Sabha) से निलंबित(Suspended) किया गया है। अब ये 12 सांसद संपूर्ण सत्र के दौरान सदन नहीं आ पाएंगे। निलंबित सांसद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, भाकपा, माकपा और शिवसेना से हैं। अब आप लोग सोच रहे होंगे संसद का आज पहला दिन और इन सांसदो को पहले दिन ही क्यों निष्कासित कर दिया गया?

इस मामले की शुरुआत शीतकालीन सत्र से नहीं बल्कि मानसून सत्र से होती है। दरअसल, राज्यसभा(Rajya Sabha) ने 11 अगस्त को संसद के मानसून सत्र के दौरान सदन में हंगामा करने वाले 12 सांसदों को सोमवार को संसद के पूरे शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित कर दिया। ये वही सांसद हैं, जिन्होंने पिछले सत्र में किसान आंदोलन(Farmer Protest) अन्य कई मुद्दों को लेकर संसद के उच्च सदन(Rajya Sabha) में खूब हंगामा किया था। इन सांसदों पर कार्रवाई की मांग की गई थी जिस पर राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू को फैसला लेना था।

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